विदेश में रह रहे पति को वर्चुअल माध्यम से पेश होने की अनुमति, तीन माह तक कठोर कार्रवाई पर रोक

Rashtriya Shikhar
3 Min Read
Husband living abroad allowed to appear virtually; strict action stayed for three months. IMAGE CREDIT TO इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रोफाइल फोटो

प्रयागराज (शिखर समाचार)।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वैवाहिक विवाद से जुड़े प्रकरण में विदेश में रह रहे पति को मध्यस्थता प्रक्रिया में वर्चुअल माध्यम से शामिल होने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने पूनम चंद व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में यह आदेश दिया, जिसमें अधिवक्ता अपूर्व हजेला की प्रभावी पैरवी रही।

वर्चुअल माध्यम से मध्यस्थता की अनुमति

ALSO READ:https://www.aajtak.in/uttar-pradesh/story/ghaziabad-bank-guard-shoots-dead-manager-in-loni-over-leave-dispute-lclam-rpti-2497998-2026-03-16

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अपूर्व हजेला ने न्यायालय को बताया कि मामला पूर्णतः वैवाहिक प्रकृति का है और पति अंकुर चंद वर्तमान में विदेश में हैं। भौगोलिक दूरी के कारण उनकी भौतिक उपस्थिति संभव नहीं थी। न्यायालय ने उनके तर्कों को स्वीकार करते हुए वर्चुअल माध्यम से शामिल होने की अनुमति प्रदान की और मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र को आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मध्यस्थता प्रक्रिया और सुलह प्रयास

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/corporation-officials-hold-joint-meeting/

न्यायालय ने यह भी पाया कि विवाद की प्रकृति वैवाहिक है और आपसी सहमति से समाधान की संभावना मौजूद है। इसलिए प्रकरण को उच्च न्यायालय के मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र, प्रयागराज को भेजा गया और दोनों पक्षों को सुलह का अवसर दिया गया। आवेदकों को तीन सप्ताह के भीतर 50 हजार रुपये जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें 25 हजार रुपये विपक्षी पक्ष को पहली उपस्थिति पर, 20 हजार दूसरी उपस्थिति पर और 5 हजार मध्यस्थता केंद्र को दिए जाएंगे। मध्यस्थता केंद्र को तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी और मामला रिपोर्ट के साथ पुनः सूचीबद्ध किया जाएगा।

राहत और अगली कार्रवाई

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/wahab-chaudhary-expelled-from-bsp/

न्यायालय ने आवेदकों को राहत देते हुए अगली सुनवाई तक उनके विरुद्ध किसी कठोर कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। यदि निर्धारित समयावधि में 50 हजार रुपये जमा नहीं किए गए, तो यह राहत स्वतः समाप्त हो जाएगी।

मामला और पृष्ठभूमि

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/sant-balyogi-umeshnath-maharaj-meets-pm/

यह प्रकरण वर्ष 2022 में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें दहेज उत्पीड़न, मारपीट और आपराधिक धमकी जैसी धाराएं लगी थीं। न्यायालय के इस आदेश से तकनीकी माध्यमों के उपयोग के जरिए न्याय प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली है।

Share This Article
Leave a comment