अरणि गौड़
नई दिल्ली (शिखर समाचार)।
भारत की चीता संरक्षण यात्रा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। कूनो नेशनल पार्क में भारतीय मूल की एक मादा चीता ने जंगल में चार शावकों को जन्म दिया है। यह घटना देश में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह भारत के चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
कूनो में पहली बार जंगल में सफल प्रजनन
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मादा चीता गामिनी की संतति है, जिसकी उम्र लगभग 25 महीने है और जो पिछले एक वर्ष से अधिक समय से खुले जंगल में रह रही है। इसने प्राकृतिक परिस्थितियों में चार शावकों को जन्म देकर यह सिद्ध कर दिया है कि भारत में चीते अब धीरे-धीरे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप ढलने लगे हैं।
चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम में ऐतिहासिक उपलब्धि
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मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि वर्ष 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम के बाद यह पहली बार है जब किसी चीता ने खुले जंगल में सफलतापूर्वक शावकों को जन्म दिया है। विशेष रूप से यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें भारतीय मूल की मादा चीता शामिल है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस परियोजना के मूल उद्देश्यों—जंगल में चीते का सुरक्षित जीवन और प्राकृतिक रूप से प्रजनन—की दिशा में एक बड़ी सफलता है। साथ ही यह कूनो नेशनल पार्क में किए जा रहे वैज्ञानिक प्रबंधन, सतत निगरानी और संरक्षण कार्यों की प्रभावशीलता को भी दर्शाती है।
अधिकारियों और टीम के प्रयासों की सराहना
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भूपेंद्र यादव ने इस सफलता के लिए वन्यजीव प्रबंधकों, पशु चिकित्सकों और फील्ड स्टाफ के समर्पण और अथक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया।
यह घटना न केवल कूनो नेशनल पार्क बल्कि पूरे भारत के वन्यजीव संरक्षण अभियान के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो भविष्य में चीता आबादी के स्थायी पुनर्स्थापन की संभावनाओं को और अधिक मजबूत करता है।
