आरव शर्मा
गाज़ियाबाद (शिखर समाचार)|
आवास आयुक्त डॉ. बलकार सिंह की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आवास विकास परिषद की गाजियाबाद टीम पिछले डेढ़ वर्ष से अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार और निर्णायक कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में वसुंधरा योजना में एक बार फिर आवास विकास की सख़्ती देखने को मिली, जहां नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला।
एनजीटी नियमों की धज्जियां उड़ाते बिल्डरों की रातों-रात अवैध निर्माण की हरकतें, अतिरिक्त फ्लैट और सेटबैक का उल्लंघन
अधीक्षण अभियंता अजय कुमार मित्तल के अनुसार पिछले कई महीनों से एनजीटी द्वारा लागू ग्रेप की पाबंदियों और अधिकांश स्टाफ की चुनाव आयोग की SIR ड्यूटी का अनुचित लाभ उठाते हुए कुछ निर्माणकर्ताओं और बिल्डरों ने रातों रात अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया। स्वीकृत मानचित्रों की खुली अवहेलना करते हुए अतिरिक्त तल खड़े किए गए, पूरे सेटबैक को कवर कर लिया गया और स्टिल्ट फ्लोर में अवैध रूप से अतिरिक्त फ्लैट बना दिए गए।
वसुंधरा योजना के विभिन्न कॉम्प्लेक्स और सोसायटियों में वर्षों से सार्वजनिक और कॉमन एरिया पर चोरी छिपे अवैध निर्माण की समस्या बनी हुई है। खंड की टीम द्वारा बार बार मना करने और नोटिस जारी किए जाने के बावजूद न तो अवैध निर्माण रोके गए और न ही नियमों का पालन किया गया। उल्टा, जब कार्रवाई की बारी आई तो आवंटी और स्थानीय लोगों द्वारा प्रबल विरोध किया गया, लेकिन आवास विकास की टीम अपने मिशन से टस से मस नहीं हुई।
ग्रेप में ढील मिलते ही कार्रवाई तेज़
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पिछले दो दिनों में अधिशासी अभियंता निखिल माहेश्वरी के नेतृत्व में टीम निर्माण खंड-1 ने बिल्डर लॉबी के भारी विरोध का डटकर सामना करते हुए वसुंधरा योजना के *छ भवनों—5/1519, 3/447, 13/477, 17G/219, 17B/203 और 17E/714 में ध्वस्तीकरण की प्रभावी कार्रवाई की।
इसी कड़ी में आज एक बार फिर तेज़ और सख़्त कदम उठाते हुए टीम CD-1 ने भवन संख्या 17G/219, 17B/203 और 17E/714 में अवैध निर्माणों को ताबड़तोड़ तरीके से ध्वस्त किया। वहीं पहले से चिन्हित भवन संख्या 5/1519, 3/447 और 13/477 में भी ग्रेप में ढील मिलते ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

आवास विकास परिषद की यह कार्रवाई न केवल अवैध निर्माणकर्ताओं के लिए कड़ा संदेश है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि नियमों से खिलवाड़ करने वालों के लिए वसुंधरा में अब कोई जगह नहीं है। परिषद की टीम ने यह साबित कर दिया है कि दबाव, विरोध और साजिशों के बावजूद कानून का राज सर्वोपरि है और अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान आगे भी इसी सख़्ती से जारी रहेगा।
