गाजियाबाद (शिखर समाचार) स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को लेकर किए जा रहे दावों के बीच गाजियाबाद नगर निगम की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक सामने आ रही है। नगर निगम सीमा के अंतर्गत 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं है। स्थानीय स्तर पर हुई जांच, नागरिकों की शिकायतें और जमीनी हालात निगम के दावों को पूरी तरह झुठलाते नजर आ रहे हैं।
गंदा पानी और स्वास्थ्य संकट: हजारों परिवार पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे दूषित जल
कई इलाकों में पानी में क्लोरीन की मात्रा मानकों से कम पाई गई है, जबकि अनेक स्थानों पर पानी से दुर्गंध आने, मटमैला होने और गंदगी दिखने की शिकायतें आम हैं। हालात यह हैं कि हजारों परिवार मजबूरी में इसी दूषित पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने में कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है।
मलिन बस्तियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। जगह जगह जर्जर पाइपलाइन, पानी की लीकेज और सीवर लाइन के पास से गुजर रही पेयजल लाइनों के कारण गंदे पानी के मिश्रण की आशंका बनी हुई है। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा स्थायी समाधान के बजाय केवल औपचारिक निरीक्षण और कागजी कार्रवाई तक ही सीमित प्रयास किए जा रहे हैं।
बदहाल जलाशय और अधूरी सफाई: नगर निगम की दिखावटी पहल के बीच घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी
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नगर निगम क्षेत्र में मौजूद कई पानी की टंकियां और केंद्रीय जलाशय लंबे समय से बदहाल स्थिति में हैं। सफाई के नाम पर अभियान जरूर चलाया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश जगहों पर यह महज दिखावटी साबित हो रहा है। अधूरी या अनियमित सफाई के चलते गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है।
पानी की गुणवत्ता को लेकर नागरिकों की शिकायतों पर भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। लीकेज की सूचना देने के बाद कई कई दिनों तक मरम्मत नहीं होती, जबकि सीवर सफाई की स्थिति भी बेहद खराब बनी हुई है। इसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ रहा है।
महाप्रबंधक से संपर्क विफल: जलकल विभाग की जवाबदेही पर उठे सवाल
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इस पूरे मामले में जब जलकल विभाग के महाप्रबंधक से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात संभव नहीं हो सकी। कई बार फोन मिलाने के बावजूद उनका फोन नहीं उठा, जिससे विभागीय जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस और ईमानदार कदम नहीं उठाए गए तो गाजियाबाद में कभी भी इंदौर जैसा कांड दोहराया जा सकता है। दूषित पेयजल के कारण किसी बड़े हादसे या जलजनित बीमारी के फैलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। सवाल यह है कि आखिर कब तक गाजियाबाद की जनता असुरक्षित पानी पीने को मजबूर रहेगी और कब नगर निगम अपने दावों को धरातल पर उतारने में कामयाब हो पाएगा यह देखने की बात है।
