संसद में बोलने की स्वतंत्रता नियमों के अधीन, अव्यवस्था से संसद की गरिमा को ठेस: लोकसभा अध्यक्ष

Rashtriya Shikhar
4 Min Read
Freedom of speech in Parliament is subject to rules IMAGE CREDIT TO लोकसभा अध्यक्ष प्रोफाइल फोटो

नई दिल्ली (शिखर समाचार)
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि संसद में बोलने की स्वतंत्रता अवश्य है, लेकिन यह स्वतंत्रता संविधान और सदन के नियमों के अधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी माननीय सदस्य को नियमों से परे जाकर बोलने का विशेषाधिकार प्राप्त नहीं है।

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद दिया संदेश

ALSO READ:https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/ghaziabad/loni/news/ghaziabad-minor-student-rape-accused-arrested-ajmer-trip-137391861.html

अध्यक्ष ने यह बात उस समय कही जब अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा समाप्त होने के एक दिन बाद उन्होंने सदन को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में सदन में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई, जिसमें विभिन्न दलों के सदस्यों ने अपने विचार और तर्क रखे।

उन्होंने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र की विशेषता यही है कि यहां हर आवाज सुनी जाती है और हर दृष्टिकोण को महत्व दिया जाता है।

संविधान और संसदीय नियमों के अधीन है वाक् स्वतंत्रता

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/in-the-cough-syrup-case-ghaziabad-police/

संविधान के अनुच्छेद 105 का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि संसद में वाक् स्वतंत्रता का अधिकार संविधान में दिया गया है, लेकिन यह संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं की सीमा के भीतर ही लागू होता है। उन्होंने कहा कि सदन में बोलने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं और सभी सदस्यों को उनका पालन करना चाहिए।

सदन में बोलने के अवसरों को लेकर उठे सवालों पर अध्यक्ष ने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि विपक्ष के नेता किसी भी समय अपनी पसंद के विषय पर बोल सकते हैं, जबकि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार ही चलती है और ये नियम सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं।

माइक्रोफोन बंद करने के आरोप खारिज

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/maruti-van-caught-fire-due-to-short-circuit/

अध्यक्ष ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि पीठासीन अधिकारी विपक्षी सदस्यों के माइक्रोफोन बंद कर देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आसन के पास माइक्रोफोन को ऑन या ऑफ करने का कोई बटन नहीं होता। सदन में जिस सदस्य को बोलने की अनुमति दी जाती है, केवल उसी का माइक्रोफोन सक्रिय रहता है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा का आसन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संविधान की भावना का प्रतीक है। संसद 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है और हर सांसद जनता की आकांक्षाओं को लेकर सदन में आता है।

संसद की मर्यादा बनाए रखने की अपील

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/social-felicitation-of-bjps-newly-appointed/

सदन में नारेबाजी, तख्तियां दिखाने और व्यवधान को लेकर अध्यक्ष ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे आचरण से संसद की गरिमा और प्रतिष्ठा प्रभावित होती है। लोकतंत्र में असहमति और तीखी बहस स्वाभाविक है, लेकिन लोकतांत्रिक विमर्श और अव्यवस्था के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है।

अंत में उन्होंने सभी दलों के सांसदों से संसद की मर्यादा बनाए रखने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।

Share This Article
Leave a comment