हापुड़ (शिखर समाचार) नगर के जवाहरगंज क्षेत्र में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। प्रातःकाल से ही कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई। पूरा वातावरण राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के संकीर्तन से भक्तिमय हो उठा।
पाप से पुण्य तक की यात्रा: धुंधकारी प्रसंग में भक्ति और मोक्ष का दिव्य संदेश
कथा व्यास डॉ. शैल बिहारी दास ने धुंधकारी प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए उसके जीवन, पतन और अंततः उद्धार की कथा श्रोताओं के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि धुंधकारी ने अपने पापकर्मों का त्याग कर सत्संग और भक्ति का मार्ग अपनाया, जिससे उसका कल्याण संभव हो सका। गोकर्ण के माध्यम से हुए उसके उद्धार का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण जीव के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य से भूल हो जाना स्वाभाविक है, लेकिन समय रहते आत्मचिंतन, सुधार और प्रायश्चित आवश्यक है। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो वही भूल पाप का रूप धारण कर लेती है। कथा के दौरान कई प्रसंगों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूबते नजर आए।
भागवत का दिव्य संदेश: आत्मबल, कर्म और जीवन की शाश्वत सत्यता
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डॉ. शैल बिहारी दास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को आत्मबल प्रदान करता है, जिससे वह निर्भीक, संयमी और शक्तिशाली बनता है। भागवत जीवन को कर्मशील बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कर्म के सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अच्छे कर्मों का फल शुभ और बुरे कर्मों का फल अशुभ होता है, यही जीवन का शाश्वत सत्य है।
कथा आयोजन में राकेश अग्रवाल, विशाल अग्रवाल, नेहुल अग्रवाल, सुमन अग्रवाल, यथार्थ अग्रवाल, भावना अग्रवाल, चंद्र प्रकाश ठठेरे, पूनम कर्णवाल, शान्तुन सिंघल, राहुल सिंघल, संजीव रस्तोगी, बिट्टू वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
