कंस के अत्याचारों से कराह उठी धरती, तब भगवान कृष्ण ने लिया अवतार : डॉ. शैल बिहारी दास

Rashtriya Shikhar
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The earth groaned due to the atrocities of Kansa, then Lord Krishna incarnated: Dr. Shail Bihari Das IMAGE CREDIT TO REPORTER

हापुड़ (शिखर समाचार)
नगर के जवाहर गंज मोहल्ले में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा के छठवें दिवस श्रद्धा और भक्ति का विशेष संगम देखने को मिला। कथा के दौरान कंस वध और श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन किया गया। सचित्र झांकियों ने कथा प्रसंगों को सजीव बना दिया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

श्रीकृष्ण का अवतार: अधर्म पर विजय और कंस के अत्याचार का अंत

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कथा व्यास डॉ. शैल बिहारी दास ने अपने प्रवचन में बताया कि भगवान विष्णु के पृथ्वी लोक में अवतरण के कई कारण रहे, जिनमें प्रमुख कारण अत्याचारी कंस का अंत करना था। कंस के पापाचार और निर्दयता से जब धरती त्राहि-त्राहि करने लगी और देवताओं ने भगवान से रक्षा की प्रार्थना की, तब श्रीकृष्ण का अवतार हुआ। कंस को यह भली-भांति ज्ञात था कि उसका अंत श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है, इसी भय से उसने बाल्यकाल में ही अनेक षड्यंत्र रचे, किंतु प्रत्येक बार ईश्वर की लीला के आगे उसके प्रयास निष्फल सिद्ध हुए।

डॉ. शैल बिहारी दास ने बताया कि अल्प आयु में ही कंस ने अपने मंत्री अक्रूर के माध्यम से मल्ल युद्ध के बहाने श्रीकृष्ण और बलराम को मथुरा बुलवाया और उन्हें बलवान पहलवानों व उन्मत्त हाथियों से मरवाने का प्रयास किया, लेकिन सभी योद्धा भगवान के पराक्रम के सामने टिक न सके। अंततः श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर मथुरा को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। कंस वध के पश्चात भगवान ने अपने माता पिता वसुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त कराया तथा कंस द्वारा बंदी बनाए गए महाराज उग्रसेन को भी स्वतंत्र कर मथुरा का राजसिंहासन सौंपा।

रुक्मिणी का हरण और श्रीकृष्ण से विवाह: प्रेम और धर्म की अद्भुत लीला

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कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया। बताया गया कि रुक्मिणी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है और वे विदर्भ नरेश की पुत्री थीं। उनका मन विष्णु स्वरूप श्रीकृष्ण में रमा हुआ था, किंतु उनके पिता और भ्राता इस विवाह के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल और जरासंध जैसे राजाओं से कराने का निश्चय किया। यह समाचार मिलने पर रुक्मिणी ने दूत के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया। इसके पश्चात संघर्ष और युद्ध हुआ और अंततः श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उनसे विधिवत विवाह किया। कथा के समापन पर आरती संपन्न हुई और उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

इस अवसर पर विशाल अग्रवाल, मनोज कर्णवाल, विकास गोयल, सुमन अग्रवाल, यर्थाथ अग्रवाल, भावना अग्रवाल, चंद्र प्रकाश ठठेरे, पूनम कर्णवाल, शान्तुन सिंघल, राहुल सिंघल, संजीव रस्तोगी, आयुष बिट्टू वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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