नई दिल्ली (शिखर समाचार) जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में आयोजित हैंडलूम एवं हस्तशिल्प एक्सपो ‘संरचना’ का बुधवार को वस्त्र मंत्रालय की विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी में लगे स्टॉलों का अवलोकन किया और देश के विभिन्न राज्यों से आए बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों एवं कारीगरों से संवाद कर उनके शिल्प कौशल की सराहना की।
भारत वीव्स प्राइड का विशेष फैशन शोकेस: पांच संग्रहों में जीवंत हुई देश की समृद्ध वस्त्र परंपरा
निरीक्षण के अवसर पर आयोजित विशेष फैशन शोकेस भारत वीव्स प्राइड इन एवरी यार्न ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह कॉन्सेप्ट आधारित प्रस्तुति भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा की यात्रा को पाँच अलग अलग संग्रहों के माध्यम से दर्शाती है।
वैदिक कलेक्शन टाइमलेस हेरिटेज में प्राचीन वैदिक प्रेरणाओं को आधुनिक परिधानों के साथ प्रस्तुत किया गया, जबकि खादी कलेक्शन धागा दर्पण: वूवन फ्रीडम में खादी को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक रूप में नए दृष्टिकोण के साथ उभारा गया।
“सिक्स यार्ड्स ऑफ लिगेसी” में पारंपरिक बुनाई और शिल्प परंपराओं का समकालीन अंदाज
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इसके साथ साड़ी कलेक्शन सिक्स यार्ड्स ऑफ लिगेसी के जरिए विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक बुनाइयों और शिल्प परंपराओं को समकालीन शैली में प्रदर्शित किया गया।
फैशन शोकेस के अगले चरण में हैंडलूम एग्जीक्यूटिव वियर थ्रेड्स फॉर टुमॉरो के माध्यम से पेशेवर परिधानों में हथकरघा वस्त्रों की उपयोगिता को रेखांकित किया गया। समापन प्रस्तुति फुलकारी कलेक्शन थ्रेड्स ऑफ जॉय में रंगों, भावनाओं और लोककथाओं से सजी फुलकारी कढ़ाई की जीवंत झलक मंच पर देखने को मिली।
नेशनल डिज़ाइन सेंटर एक्सपो: भारतीय हथकरघा और शिल्प को राष्ट्रीय मंच पर बढ़ावा, 18 जनवरी तक खुला आमजन के लिए
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नेशनल डिज़ाइन सेंटर द्वारा आयोजित यह एक्सपो 18 जनवरी 2026 तक चलेगा और प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा। आयोजन विकास आयुक्त (हथकरघा), राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय जूट बोर्ड, नाबार्ड तथा सत्यम फैशन इंस्टिट्यूट के सहयोग से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय हथकरघा, हस्तकला और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना तथा कारीगरों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है।
संरचना एक्सपो में हैंडीक्राफ्ट्स, हैंडलूम वस्त्र, जूट उत्पाद, होम डेकोर, उपहार सामग्री और वस्त्रों की विविध श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। देशभर से आए 100 से अधिक प्रतिभागी जिनमें बुनकर, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियाँ और उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं इस मंच पर अपने उत्पादों को प्रस्तुत कर रहे हैं। पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक उपभोक्ताओं के बीच सेतु बनता यह एक्सपो न केवल कारीगरों को सशक्त कर रहा है, बल्कि शहरी दर्शकों को भी भारतीय हथकरघा की विविधता, संस्कृति और विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है।
