अरणि गौड़
नई दिल्ली (शिखर समाचार)।
देश के तीन राज्यों असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को हुए मतदान ने भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इन राज्यों के मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह का परिचय देते हुए अब तक का सर्वाधिक मतदान दर्ज कराया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि लोकतंत्र के प्रति जनता की आस्था और भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
असम में रिकॉर्ड मतदान और महिला भागीदारी
आंकड़ों के अनुसार असम में 2026 के विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 85.91 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो राज्य के इतिहास का सर्वोच्च स्तर है। इस चुनाव की सबसे उल्लेखनीय बात महिला मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी रही, जहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत 86.50 रहा, जो पुरुषों के 85.33 प्रतिशत से अधिक है। यह बदलाव समाज में महिलाओं की बढ़ती जागरूकता और सशक्त उपस्थिति को दर्शाता है।
पुडुचेरी में भी मतदाताओं ने रिकॉर्ड कायम किया। यहां कुल मतदान 89.87 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि महिला मतदाताओं की भागीदारी 91.40 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह आंकड़ा न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
केरल में भी नया कीर्तिमान
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केरल, जो पहले से ही उच्च मतदान प्रतिशत के लिए जाना जाता है, ने भी इस बार नया कीर्तिमान स्थापित किया। यहां 2026 के विधानसभा चुनाव में कुल 78.27 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 81.19 प्रतिशत रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिकॉर्ड मतदान के पीछे बढ़ती राजनीतिक जागरूकता एक प्रमुख कारण है। डिजिटल माध्यमों और सामाजिक मंचों के विस्तार ने मतदाताओं को अधिक जागरूक और सक्रिय बनाया है। इसके साथ ही राजनीतिक दलों की व्यापक प्रचार रणनीतियों और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों ने भी मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महिलाओं ने संभाली लोकतंत्र की कमान
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इस उपलब्धि का श्रेय चुनाव आयोग की सक्रियता को भी दिया जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने मतदाता जागरूकता, सरल मतदान प्रक्रिया और विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं को जोड़ने के लिए कई प्रभावी पहल कीं। SVEEP कार्यक्रम के माध्यम से “मतदाता ही लोकतंत्र की असली ताकत है” संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम मतदान प्रतिशत में वृद्धि के रूप में सामने आया।
तीनों राज्यों में एक समान रुझान देखने को मिला—महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर या उससे अधिक रही। यह न केवल सामाजिक बदलाव का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शिक्षा और जागरूकता के प्रसार ने महिलाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अग्रणी बना दिया है।
लोकतंत्र के लिए उत्साहजनक संकेत
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विशेषज्ञों के अनुसार यह रिकॉर्ड मतदान लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि अब जनता केवल दर्शक नहीं रही, बल्कि सक्रिय भागीदारी निभा रही है। ऐसे रुझान भविष्य में और अधिक सशक्त और जवाबदेह शासन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।
