रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं के बीच अभूतपूर्व एकजुटता और समन्वय का प्रतीक

Rashtriya Shikhar
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Defence Minister Rajnath Singh described Operation Sindur as a symbol of unprecedented unity and coordination among the three armed forces IMAGE CREDIT O PIB

नई दिल्ली (शिखर समाचार) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं के बीच अभूतपूर्व एकजुटता और समन्वय का प्रतीक रहा है। उन्होंने बताया कि यह अभियान बदलती वैश्विक परिदृश्य और युद्ध की आधुनिक स्वरूपों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार की गई भारत की रणनीतिक दृष्टि का एक सशक्त उदाहरण है।

राष्ट्रीय सुरक्षा की नई रणनीति: आधुनिक युद्ध के लिए सामरिक स्वायत्तता और सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण

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रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि अब पारंपरिक रक्षा दृष्टिकोण पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि युद्ध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है। आधुनिक संघर्ष मिश्रित और बहुस्तरीय स्वरूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सुदृढ़ करने और देश की सामरिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण हेतु कई साहसिक और निर्णायक सुधार लागू किए हैं।

इस अवसर पर उन्होंने बताया कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) का पद तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को मजबूती देने के लिए ऐतिहासिक कदम था। ऑपरेशन सिंदूर ने इसी संयुक्तता और एकीकृत कार्रवाई की अद्भुत क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब तक हमारे सशस्त्र बलों द्वारा दी गई करारी हार से उबर नहीं पाया है।

असैन्य-सैन्य सम्मिश्रण: राष्ट्र की तकनीकी आत्मनिर्भरता की रणनीतिक कुंजी

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कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) द्वारा लिखित पुस्तक ‘सिविल-मिलिट्री फ्यूजन एज अ मेट्रिक ऑफ नेशनल पावर एंड कॉम्प्रिहेंसिव सिक्योरिटी’ का विमोचन भी किया गया। राजनाथ सिंह ने पुस्तक की मुख्य अवधारणा को साझा करते हुए कहा कि असैन्य-सैन्य सम्मिश्रण केवल एकीकरण नहीं बल्कि एक रणनीतिक प्रेरक है, जो नवाचार को बढ़ावा देता है, प्रतिभा को संरक्षित रखता है और राष्ट्र को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए असैन्य उद्योग, निजी क्षेत्र, शिक्षा संस्थान और रक्षा क्षेत्र को साझा राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ जोड़ना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्व में श्रम विभाजन से आगे बढ़कर उद्देश्य एकीकरण का महत्व बढ़ गया है। अलग-अलग इकाइयां भले ही अलग जिम्मेदारी निभाती हों, लेकिन साझा दृष्टिकोण और समन्वय के बिना राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि असैन्य प्रशासन और सेना अलग हैं, पर प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार सभी प्रशासनिक तंत्र अब मिलकर काम कर रहे हैं।

प्रौद्योगिकी और सुरक्षा का संगम: ‘दोहरे उपयोग’ से बढ़ेगी राष्ट्रीय शक्ति

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रक्षा मंत्री ने वर्तमान तकनीक-प्रेरित युग में असैन्य-सैन्य एकीकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि अब प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा आपस में गहराई से जुड़ चुके हैं। उन्होंने ‘दोहरे उपयोग’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि नवाचारों को सैन्य अनुप्रयोगों में लाकर राष्ट्रीय शक्ति को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

राजनाथ सिंह ने सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि सशस्त्र बल, सरकार, उद्योग, स्टार्ट-अप, अनुसंधान संस्थान और युवा नवप्रवर्तक मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत अब तेजी से रक्षा निर्माण में वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश का घरेलू रक्षा उत्पादन एक दशक पहले 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसमें 33,000 करोड़ रुपये निजी क्षेत्र का योगदान है। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष उपेन्द्र द्विवेदी, यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक मेजर जनरल बी.के. शर्मा (सेवानिवृत्त) और कई वरिष्ठ सैन्य तथा असैन्य अधिकारी एवं पूर्व सैनिक भी उपस्थित थे।

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