गांवों के बच्चों की शिक्षा पर संकट : स्कूलों को बंद करने के सरकारी फरमान के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, प्रधान और अभिभावक

राष्ट्रीय शिखर
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Crisis on education of children in villages

ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार)
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों के युग्मन या बंद करने को लेकर जारी किए गए आदेशों ने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में हलचल मचा दी है। जनपद गौतमबुद्धनगर में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा कई स्कूलों को बंद करने के लिए औपचारिक पत्र भी जारी कर दिए गए हैं, जिससे शिक्षा से वंचित तबके में भारी आक्रोश है।

इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के निर्देश पर जिले के सभी विकास खंडों में विरोध की लहर तेज हो गई है। ब्लॉक अध्यक्षों की अध्यक्षता में शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, ग्राम प्रधानों, विद्यालय प्रबंधन समितियों के अध्यक्षों और सैकड़ों अभिभावकों के साथ मिलकर विरोध सभाएं की जा रही हैं।

कंपोजिट विद्यालय सादोपुर में आयोजित एक विशेष बैठक में गांव-गांव से आए लोगों ने खुलकर अपनी आवाज बुलंद की

कंपोजिट विद्यालय सादोपुर में आयोजित एक विशेष बैठक में गांव-गांव से आए लोगों ने खुलकर अपनी आवाज बुलंद की। बैठक में स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि स्कूलों का बंद होना सीधे-सीधे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा के अधिकार पर कुठाराघात है। कई अभिभावकों ने कहा कि अगर पास के स्कूल बंद हो गए तो उनके बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह रुक जाएगी क्योंकि दूर-दराज के स्कूल तक पहुंचना उनके लिए संभव नहीं होगा।

जिला अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा कि यह आदेश सिर्फ स्कूलों को बंद नहीं कर रहा

मंडल अध्यक्ष मेघराज भाटी ने सरकार की इस नीति को गरीब विरोधी करार देते हुए दो टूक कहा कि उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ चुप नहीं बैठेगा। यह फैसला न तो शिक्षक हित में है और न ही छात्र हित में। जिला अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा कि यह आदेश सिर्फ स्कूलों को बंद नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य के सपनों को कुचल रहा है। उन्होंने इसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम के भी खिलाफ बताया।

जिला मंत्री गजन भाटी ने खुलासा किया कि विभाग पहले ही 25 प्रतिशत स्कूल कंपोजिट के नाम पर और अब 25 प्रतिशत स्कूल युग्मन के नाम पर बंद कर चुका है। जबकि शासनादेश साफ कहता है कि ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, अभिभावक और प्रधानाध्यापक की सहमति के बिना कोई भी स्कूल बंद नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनमाने ढंग से कार्यवाही कर रहे हैं।

बैठक में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि किसी भी हालत में स्कूलों को बंद नहीं होने दिया जाएगा और मुख्यमंत्री सहित शासन के सभी उच्चाधिकारियों को विरोध पत्र भेजकर इस तुगलकी फरमान को वापस लेने की मांग की जाएगी। इस बैठक में जिले के सभी ब्लॉकों के पदाधिकारी, सैकड़ों ग्राम प्रधान, समिति अध्यक्ष, प्रधानाध्यापक और अभिभावक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि विद्यालय बंद नहीं होने देंगे, बच्चों का भविष्य नहीं उजड़ने देंगे।

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