राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ, लोकतंत्र और तकनीक पर हुआ वैश्विक मंथन

Rashtriya Shikhar
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Commonwealth Parliamentary Conference inaugurated with grand ceremony, global discussion on democracy and technology IMAGE CREDIT TO लोकसभा सचिवालय

नई दिल्ली (शिखर समाचार) संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में गुरुवार को राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री, राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश, विभिन्न राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के पीठासीन अधिकारी, सांसद तथा अनेक गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

तकनीकी युग में लोकतंत्र: अवसर, चुनौतियाँ और विधायिकाओं की साझा जिम्मेदारी

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स्वागत संबोधन में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वर्तमान समय तीव्र तकनीकी बदलावों का दौर है, जो समाज और शासन व्यवस्था दोनों को गहराई से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सामाजिक माध्यमों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को अधिक सक्षम, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है, लेकिन इनके दुरुपयोग से भ्रामक प्रचार, साइबर अपराध और सामाजिक विभाजन जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं। इन समस्याओं से निपटना विश्व की सभी विधायिकाओं की साझा जिम्मेदारी है।

ओम बिरला ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भरोसेमंद, पारदर्शी व जवाबदेह सामाजिक माध्यम ढांचे की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन इन वैश्विक मुद्दों पर गहन विचार विमर्श का मंच बनेगा और ऐसे ठोस नीतिगत सुझाव सामने आएंगे, जिनसे तकनीक का जिम्मेदार और जनहितकारी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

डिजिटल संसद की ओर भारत: तकनीक से सशक्त होती लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली

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भारत के संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि देश की संसद और राज्य विधानसभाओं में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विधायी कार्यों को चरणबद्ध ढंग से कागज रहित बनाया जा रहा है और एकीकृत डिजिटल मंच के माध्यम से संसद और विधानसभाओं को जोड़ा गया है। इससे पारदर्शिता, कार्यकुशलता और आम नागरिकों की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि संसद और सरकार के संयुक्त प्रयासों से अनेक पुराने और अप्रासंगिक कानून समाप्त किए गए हैं तथा जनकल्याण पर केंद्रित नए कानून बनाए गए हैं। इन सुधारों से भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत की सात दशक से अधिक की संसदीय यात्रा पर प्रकाश डालते हुए ओम बिरला ने कहा कि जनकेंद्रित नीतियों, कल्याणकारी कानूनों और निष्पक्ष एवं सुदृढ़ निर्वाचन व्यवस्था ने भारतीय लोकतंत्र को लगातार मजबूत किया है। इन प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी बढ़ी है और जनता का विश्वास और गहरा हुआ है।

वैश्विक चुनौतियों पर साझा विमर्श: राष्ट्रमंडल संसदीय मंच की निर्णायक भूमिका

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राष्ट्रमंडल के संसदीय मंच की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन विश्व भर के पीठासीन अधिकारियों को एक साथ लाकर वैश्विक महत्व के विषयों पर साझा चिंतन का अवसर प्रदान करते हैं। उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक विवेक और साझा जिम्मेदारी समय की आवश्यकता है।

ओम बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और व्यापक सुधारों के चलते भारत आज विश्व की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए भारत निर्णायक भूमिका निभा रहा है और दुनिया दिशा, स्थिरता और प्रेरणा के लिए भारत की ओर देख रही है।

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सम्मेलन के एजेंडे का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पूर्ण सत्रों में संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, सामाजिक माध्यमों का सांसदों पर प्रभाव, नागरिक सहभागिता बढ़ाने की नवीन रणनीतियां, सांसदों और संसदीय कर्मचारियों की सुरक्षा व कल्याण, तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में पीठासीन अधिकारियों की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। उन्होंने कहा कि जनता की नजर में संसदीय संस्थाओं की गरिमा, विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी लोकतंत्रों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल के 53 संप्रभु देशों की संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 14 अर्ध स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं। कुल 42 सदस्य देशों और 4 अर्ध स्वायत्त संसदों से आए 61 पीठासीन अधिकारी, जिनमें 45 अध्यक्ष और 16 उपाध्यक्ष शामिल हैं, इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता कर रहे हैं। लोक सभा अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन से निकले विचार और निष्कर्ष संसदीय प्रक्रियाओं में सुधार, जनभागीदारी में वृद्धि और लोकतांत्रिक संस्थाओं में नागरिकों के विश्वास को और मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगे। सम्मेलन का समापन शुक्रवार को लोक सभा अध्यक्ष के समापन संबोधन के साथ होगा।

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