नई दिल्ली (शिखर समाचार) उत्तर भारत के बाढ़ प्रभावित राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मोबाइल नेटवर्क सेवाओं को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए केंद्र सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। इस मुद्दे पर केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सचिव (दूरसंचार) डॉ. नीरज मित्तल, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) तथा निजी दूरसंचार कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ प्रभावित जिलों में संचार बहाली पर युद्धस्तरीय कार्रवाई के निर्देश दिए
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रभावित जिलों की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के डोडा और उधमपुर, जो बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, वहाँ संचार सेवाओं की बहाली तत्काल युद्धस्तर पर की जाए। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतर-जिला और घाटी संपर्क में आ रही बाधाओं पर निरंतर निगरानी रखी जाए, ताकि आमजन को शीघ्र राहत मिल सके।
अधिकारियों ने मंत्री को अवगत कराया कि ज़्यादातर फाइबर कट की मरम्मत हो चुकी है और जमीनी स्तर पर टीमें लगातार क्षतिग्रस्त लाइनों को ठीक कर रही हैं। जहाँ नेटवर्क पूरी तरह से ठप है, वहाँ वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंट्रा-सर्किल रोमिंग (आईसीआर) लागू कर दी गई है, जिससे लोग अन्य ऑपरेटरों के नेटवर्क से जुड़ पा रहे हैं। इस व्यवस्था से लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिली है।
श्री सिंधिया ने संचार बहाली को नागरिक सुरक्षा का प्राथमिक कदम बताया, तत्परता और समन्वय पर जोर
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श्री सिंधिया ने इस अवसर पर कहा कि यह आवश्यक है कि संकट की घड़ी में नागरिक अपने परिवारों और जरूरी सेवाओं से जुड़े रहें। हर संभव कदम उठाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि संचार प्रणाली जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लौट आए। उन्होंने विश्वास जताया कि दूरसंचार विभाग, बीएसएनएल और अन्य सेवा प्रदाताओं की तत्परता तथा राज्य प्रशासन के सहयोग से पूर्ण सेवा बहाली शीघ्र ही संभव होगी।
बाढ़ से जूझ रहे इन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क बहाल होना स्थानीय लोगों और राहतकर्मियों के लिए जीवनरेखा साबित होगा। सरकार का दावा है कि आने वाले कुछ दिनों में अधिकांश प्रभावित इलाकों में संचार सेवाएँ सामान्य हो जाएँगी।
