वृंदावन/मथुरा (शिखर समाचार)
सनातन संस्कृति और तीर्थ परंपराओं से जुड़े मुद्दों को लेकर नारायणी सेना की एक आवश्यक एवं निर्णायक बैठक जुगल घाट पर आयोजित की गई। बैठक में संगठन के मार्गदर्शक आचार्य रामानुज ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान समय में उन नीतियों की गहन समीक्षा अनिवार्य हो गई है, जो सनातन मूल्यों के विपरीत तथा औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित प्रतीत होती हैं।
आचार्य रामानुज ने तीर्थों और मठों के संरक्षण की आवश्यकता पर जताई गंभीर चिंता
आचार्य रामानुज ने कहा कि विकास और गलियारे के नाम पर देशभर में प्राचीन मठों, मंदिरों और पवित्र तीर्थ स्थलों को नष्ट किया जा रहा है। तीर्थ क्षेत्रों को व्यापारिक केंद्रों में बदला जा रहा है, जिससे उनकी आध्यात्मिक गरिमा, परंपरा और मर्यादा को गंभीर क्षति पहुंच रही है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि जो वास्तविक संत और साधु सनातन धर्म के उत्थान, गौ संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें समाप्त करने अथवा बदनाम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अभीमुक्तेश्वरानंद के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की गई। नारायणी सेना ने इसे पूरे संत समाज का अपमान बताते हुए प्रशासनिक रवैये पर सवाल खड़े किए। संगठन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि शंकराचार्य की गरिमा और सनातन परंपरा का सम्मान करते हुए सार्वजनिक रूप से उनसे क्षमा याचना की जाए।
वक्ताओं ने चेताया: धर्मस्थलों की पवित्रता पर खतरा, संतों का अपमान और सत्ता का संरक्षण
ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/national-voters-day-voting-is-the-soul/
वक्ताओं ने कहा कि शंकराचार्य द्वारा धर्म रक्षा के लिए संघर्ष का शंखनाद हो चुका है। सत्ता के मद में चूर लोग आज गौ माता के हत्यारों को संरक्षण दे रहे हैं, सच्चे संतों का अपमान कर रहे हैं और मठों, मंदिरों व तीर्थ स्थलों की पवित्रता को नष्ट कर रहे हैं। आरोप लगाया गया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वयं को सनातन का ठेकेदार समझने लगे हैं, जबकि अनेक बड़े धर्माचार्य और अखाड़े सत्ता के दबाव में मौन धारण किए हुए हैं।
बैठक में यह भी कहा गया कि अब समय आ गया है जब समाज को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट होकर निर्णायक कदम उठाने होंगे। इसी क्रम में घोषणा की गई कि आगामी पांच मार्च को श्रीधाम वृंदावन से संसद भवन दिल्ली तक नौ दिवसीय अलख जागृति पदयात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। इस पदयात्रा में देशभर के सनातनी, राष्ट्रभक्त साधु संतों और धर्मप्रेमी नागरिकों से सहभागिता का आह्वान किया गया। बैठक में राष्ट्रीय संयोजक अयोध्या क्रांतिकारी सुरेश बघेल, जिला प्रमुख सुमित मिश्र, कृष्ण चंद्र मिश्र, प्रमोद बाबा, कन्धहैया दास महाराज, केशव प्रसाद, राकेश निषाद सहित अनेक साधु संत और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया।
