ग्रेटर नोएडा (शिखर समाचार) ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को हैबतपुर गांव में व्यापक ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत लगभग छह हजार वर्ग मीटर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया, जहां अवैध रूप से प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसाने की तैयारी की जा रही थी।
पुलिस और प्राधिकरण की कार्रवाई: डूब क्षेत्र से अवैध निर्माण ध्वस्त, सुरक्षा सुनिश्चित
प्राधिकरण के परियोजना एवं भूलेख विभाग की संयुक्त टीम ने पुलिस बल के सहयोग से यह कार्रवाई की। मौके पर बुलडोजर चलाकर डूब क्षेत्र में खड़े अस्थायी व स्थायी निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई करीब दो घंटे तक चली, जिसमें अवैध निर्माण पूरी तरह समाप्त कर दिए गए।
प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव ने बताया कि हिंडन नदी के डूब क्षेत्र को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के स्पष्ट निर्देश हैं, जिनके अंतर्गत किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इन्हीं आदेशों के अनुपालन में प्राधिकरण लगातार ऐसे अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिसूचित क्षेत्र में बिना अनुमति अथवा बिना मानचित्र स्वीकृत कराए निर्माण करने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।
सुरक्षित निवेश की चेतावनी: जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण से पुष्टि ज़रूरी
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उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण के भूलेख विभाग से पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें, ताकि अवैध कॉलोनियों में जीवनभर की कमाई फंसने से बचाई जा सके।
दरअसल हैबतपुर गांव की खसरा संख्या 280 और 287 की भूमि हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में आती है। यह क्षेत्र प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित है, इसके बावजूद यहां अवैध निर्माण किया जा रहा था। सूचना मिलने पर परियोजना विभाग के कार्य वृत्त तीन की टीम ने मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
चेतावनी न मानने पर कार्रवाई: अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ मजबूरी में ध्वस्तीकरण
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इस अभियान में कार्य वृत्त तीन के प्रभारी राजेश कुमार निम, प्रबंधक रोहित गुप्ता सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। प्राधिकरण के महाप्रबंधक (परियोजना) ए के सिंह ने बताया कि संबंधित अवैध निर्माणकर्ताओं को पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी और निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्देशों की अनदेखी जारी रही। इसके बाद मजबूरन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी पड़ी।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि डूब क्षेत्र और अधिसूचित भूमि पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और जनसुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में भविष्य में भी अभियान जारी रहेगा।
