हरे भरे आम के बागों पर फिर गिरी कुल्हाड़ी, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

Rashtriya Shikhar
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Ax fell again on lush green mango orchards, questions raised on the role of administration IMAGE CREDIT TO REPORTER

बिजनौर (शिखर समाचार) पर्यावरण संरक्षण के तमाम दावों के बीच एक बार फिर हरे भरे आम के पेड़ों पर आरा चलने से क्षेत्र में रोष फैल गया है। धामपुर नींदडू मार्ग पर सैकड़ों आम के पेड़ों का कटान जारी है, जिसे लेकर वन विभाग की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि असली मुद्दा यह नहीं है कि अनुमति है या नहीं, बल्कि यह है कि आखिर जीवित और फलदार पेड़ों को काटने की स्वीकृति दी ही कैसे जा रही है।

धामपुर के आम बाग में 170 पेड़ों के कटान की मिली अनुमति, हजारों हरे-भरे पेड़ होंगे प्रभावित

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धामपुर क्षेत्र के जैतरा नींदडू मार्ग पर स्थित एक आम के बाग में, जहां अक्षत कुमार, अंकित कुमार और साधना अग्रवाल का स्वामित्व बताया जा रहा है, वहां सैकड़ों हरे भरे आम के पेड़ खड़े थे। जानकारी के अनुसार, 35-35 पेड़ों की तीन फाइलें और 40-40 पेड़ों की दो फाइलें स्वीकृत बताई जा रही हैं। इस प्रकार कुल 170 आम के पेड़ों के कटान की अनुमति होने की बात सामने आ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार लकड़ी ठेकेदार आबिद अहमद और अकबर ने देर रात से ही आम के पेड़ों पर बेरहमी से आरा चलाना शुरू कर दिया। जब सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने यह दृश्य देखा तो उन्होंने तुरंत धामपुर और बिजनौर के वन विभाग अधिकारियों को सूचना दी। उन्हें उम्मीद थी कि शिकायत के बाद कटान रुक जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
शिकायत करने वालों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कह दिया कि पेड़ों के कटान की अनुमति है, इसलिए काम नहीं रोका जाएगा। इस जवाब के बाद कटान रुकवाने के प्रयास ठंडे पड़ गए। वहीं जब लकड़ी ठेकेदारों से अनुमति से जुड़े दस्तावेजों के बारे में पूछा गया तो वे टालमटोल करते नजर आए और जानकारी देने से बचते रहे। उन्होंने इस संबंध में बाग मालिकों से संपर्क करने की बात कह दी। दूसरी ओर वन विभाग के दरोगा हरदेव सिंह ने 170 आम के पेड़ों के कटान की अनुमति जारी होने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि बिना स्वीकृति के किसी भी पेड़ का कटान नहीं किया जा रहा है। हालांकि सवाल अब भी कायम है कि पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हरे भरे आम के पेड़ों को काटने की अनुमति आखिर किन आधारों पर दी गई।

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