गैस किल्लत के बीच देसी चूल्हा बना सहारा, मिस्त्री की मेहनत को मिल रही सराहना

Rashtriya Shikhar
3 Min Read
Amid a gas shortage, traditional clay stoves became a lifeline, earning appreciation for the mason's hard work. IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

झिंझाना/शामली (शिखर समाचार)। क्षेत्र में रसोई गैस की किल्लत और बढ़ती महंगाई के बीच एक स्थानीय कारीगर का देसी समाधान लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। झिंझाना क्षेत्र के मोहम्मद आलम मिस्त्री ने लोहे का एक मजबूत देसी चूल्हा तैयार किया है, जो इन दिनों लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। खास बात यह है कि यह चूल्हा लकड़ी और गोबर के उपलों से आसानी से जलाया जा सकता है, जिससे गैस पर निर्भरता कम हो रही है और आम लोगों को सस्ता विकल्प मिल रहा है।

मजबूत और सस्ता देसी चूल्हा, बढ़ती मांग

ALSO READ:https://zeenews.india.com/hindi/india/up-uttarakhand/ghaziabad/photo-gallery-gda-decided-in-meeting-10-crossings-widened-and-beautified-in-ghaziabad/2875019

मोहम्मद आलम मिस्त्री द्वारा तैयार किए गए इस चूल्हे का वजन लगभग 13 किलोग्राम है, जिससे यह काफी मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला बताया जा रहा है। इसकी कीमत करीब 1700 रुपये रखी गई है, जो सामान्य परिवारों के बजट के अनुसार है। अब तक मिस्त्री द्वारा लगभग 70 चूल्हे बनाए जा चुके हैं, जिनमें से 45 से 50 चूल्हे बिक चुके हैं। लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए मिस्त्री और भी चूल्हे तैयार करने में जुटे हुए हैं।

स्थानीय लोगों को मिली राहत

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/the-leadership-of-ceo-rakesh-kumar-singh/

स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती कीमतों के चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन इस देसी चूल्हे ने उनकी समस्या को काफी हद तक कम कर दिया है। यह चूल्हा विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है, जो सीमित संसाधनों में अपना घर चलाते हैं। मोहम्मद आलम मिस्त्री की दुकान चंदनपुर रोड, करनाल बाईपास पर स्थित है, जहां आसपास के गांवों और कस्बों से लोग पहुंचकर चूल्हा खरीद रहे हैं। झिंझाना निवासी मोहम्मद नसीम राणा ने चूल्हा खरीदते हुए बताया कि गैस की किल्लत को देखते हुए यह चूल्हा उनके लिए बहुत उपयोगी रहेगा और इससे घर का काम आसानी से चल सकेगा।

देसी चूल्हा रोजगार और पारंपरिक साधनों को बढ़ावा

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/decorated-a-government-school-with-her-salary/

ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में एक बार फिर पारंपरिक साधनों की ओर रुझान बढ़ता नजर आ रहा है। कम लागत में अधिक उपयोगिता और सरल संचालन के कारण यह देसी चूल्हा न केवल लोगों की जरूरत पूरी कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी अच्छा माध्यम बनता जा रहा है।

Share This Article
Leave a comment