शामली (शिखर समाचार)। शहर की जैन धर्मशाला में आयोजित धार्मिक सभा में कैराना से पधारे मुनि 108 विशद सागर महाराज ने अपने प्रवचनों में परोपकार को मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म बताया। उन्होंने कहा कि सच्चा धर्म बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता में निहित होता है।
भगवान महावीर के सिद्धांत पर प्रकाश
मुनिराज ने भगवान महावीर के सिद्धांत “परस्परोपग्रहो जीवानाम” का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी जीव एक-दूसरे के लिए सहायक हैं और यही सच्चे धर्म की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति दूसरों के दुख को अपना समझकर उनकी सहायता करता है, तभी वह वास्तविक धर्म का पालन करता है।
प्रेरणादायक कथा: भोला राम
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प्रवचन के दौरान मुनि विशद सागर महाराज ने भोला राम नामक एक गरीब युवक की प्रेरणादायक कथा सुनाई। कथा के माध्यम से उन्होंने समझाया कि किस प्रकार उस युवक ने अपनी कठिनाइयों को दरकिनार कर दूसरों की सहायता को प्राथमिकता दी। गुरु की कृपा से उसे ऐसे समाधान प्राप्त हुए, जिससे न केवल अन्य लोगों का जीवन सुधरा बल्कि उसकी अपनी दरिद्रता भी समाप्त हो गई।
दया, सेवा और त्याग का संदेश
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मुनिराज ने कहा कि दया, सेवा और त्याग ही धर्म के सच्चे स्वरूप हैं। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से दूसरों के हित में कार्य करता है, वही सच्चा धर्मात्मा कहलाता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में परोपकार की भावना अपनाएं और समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्ग की सहायता के लिए आगे आएं।
