मोदीनगर (शिखर समाचार)।
प्रसिद्ध एवं पौराणिक सीकरी खुर्द स्थित महामाया देवी मेले में इस वर्ष भी आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। बीती रात्रि से लेकर बुधवार को सप्तमी की शाम तक मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लाखों श्रद्धालुओं ने माता महामाया देवी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। पूरे मेला क्षेत्र में माता रानी के जयकारों की गूंज से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़, यातायात प्रभावित
मेले में उमड़ी अपार भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। मेले तक पहुंचने का मुख्य मार्ग सीकरी रोड, जो दिल्ली मेरठ मार्ग से जुड़ा हुआ है, पूरे दिन वाहनों के दबाव के कारण अवरुद्ध सा रहा। स्थिति यह रही कि दिल्ली मेरठ मार्ग पर भी रुक-रुक कर यातायात चलता रहा। प्रशासन द्वारा यातायात को सुचारु बनाए रखने के प्रयास लगातार जारी रहे, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण दबाव बना रहा।
अष्टमी के अवसर पर बृहस्पतिवार को मेले में श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यद्यपि मेले में पहुंचने के लिए अन्य वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हैं, लेकिन अधिकांश श्रद्धालु सीकरी रोड का ही उपयोग करते हैं, जिससे इस मार्ग पर अधिक दबाव देखने को मिलता है।
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, भक्ति में डूबा माहौल
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मेले में न केवल स्थानीय क्षेत्र बल्कि हरियाणा, दिल्ली और आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों के माध्यम से समूहों में मेले में पहुंचते दिखाई दिए। विशेष रूप से महिलाओं के समूह माता रानी के भजन गाते हुए मेले की ओर बढ़ते नजर आए, जो आकर्षण का केंद्र बने रहे और पूरे वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना रहे थे।
श्रद्धालु माता महामाया देवी को नारियल और सबोनी का प्रसाद अर्पित कर अपनी मन्नतें मांग रहे हैं। इसके साथ ही मेला परिसर में स्थित ऐतिहासिक वट वृक्ष, जिसे आजादी का प्रतीक भी माना जाता है, वहां श्रद्धालु कलावा बांधकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना कर रहे हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी श्रद्धालु पूरे विश्वास के साथ इसका निर्वहन करते हैं।
मेले में रौनक, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा
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धार्मिक आस्था के इस विशाल आयोजन में स्थानीय व्यापार भी पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। मेले में लहसुन और मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है। इसके अलावा जलेबी और खजला जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए भी श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा गया। मेले का मुख्य आकर्षण सप्तमी और अष्टमी के दिन रहता है, जब श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। इसके बाद नवमी की शाम को विधिवत रूप से मेले का समापन किया जाता है।
मेले की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। उपजिलाधिकारी अजीत सिंह तथा सहायक पुलिस आयुक्त भास्कर वर्मा स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर पुलिस और यातायात कर्मियों की तैनाती की गई है तथा लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्वक दर्शन कर सकें।
