बिंदल्स ग्रुप पर इनकम टैक्स की बड़ी कार्रवाई: 3 करोड़ से अधिक नकदी व 20 करोड़ के आभूषण बरामद

Rashtriya Shikhar
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Major income tax action on Bindals Group: over ₹3 crore in cash and ₹20 crore in jewelry seized. IMAGE CREDIT TO रिपोर्टर

बिजनौर/गाजियाबाद (शिखर समाचार)

इनकम टैक्स विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग (मेरठ यूनिट) ने बिंदल्स ग्रुप के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए व्यापक स्तर पर टैक्स चोरी का खुलासा किया है। विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की धारा 132 के तहत मेसर्स बिंदल्स पेपर्स मिल्स लिमिटेड (बीपीएमएल) एवं उससे जुड़ी कंपनियों पर सर्च और सीज़र ऑपरेशन चलाया।

व्यापक छापेमारी और बरामदगी

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यह कार्रवाई 18 मार्च 2026 को शुरू हुई, जिसके तहत दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर समेत कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान मुजफ्फरनगर स्थित छह प्रमुख पेपर मिलों को भी जांच के दायरे में लिया गया, जिनमें बिंदल्स डुप्लेक्स लिमिटेड, अग्रवाल डुप्लेक्स बोर्ड मिल्स लिमिटेड, टिहरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड, शाकुंभरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड और बिंदल इंडस्ट्रीज लिमिटेड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बिजनौर के गांव चांगीपुर स्थित ग्रुप की शुगर यूनिट की भी गहन जांच की गई।

छापेमारी के दौरान अधिकारियों को 3 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाबी नकदी और लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण बरामद हुए। साथ ही 50 से अधिक अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए हैं।

टैक्स और लेखा अनियमितताएं

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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि समूह द्वारा खोई (गन्ने का अवशेष) सहित अन्य कच्चे माल की खरीद बिना उचित लेखा-जोखा के की जा रही थी। इसके अलावा कागज उद्योग में 50 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी खरीद का मामला भी उजागर हुआ है। जांच में यह भी पाया गया कि शुगर मिल संचालन में कागज की बेहिसाबी बिक्री और संदिग्ध नकद लेनदेन के जरिए वास्तविक मुनाफे को छिपाने का प्रयास किया गया।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू धारा 80Iए के तहत 171.3 करोड़ रुपये की कटौती के कथित गलत दावे से जुड़ा है। बिंदल पेपर्स मिल्स लिमिटेड के आंतरिक अकाउंटेंट और पावर प्लांट के जनरल मैनेजर के बयान (धारा 132(4) के तहत) में यह सामने आया कि समूह अपनी कागज, बिजली और चीनी इकाइयों के लिए अलग-अलग लेखा पुस्तिकाएं बनाए रखने में विफल रहा।

कटौती दावे पर सवाल

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जांच अधिकारियों को केवल समेकित खातों और ट्रायल बैलेंस ही उपलब्ध कराए गए, जिससे प्रथम दृष्टया कंपनी इन कर लाभों के लिए अयोग्य प्रतीत होती है। ऐसे में विभाग द्वारा इस पूरे दावे को खारिज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल तलाशी अभियान का सक्रिय चरण समाप्त हो चुका है, लेकिन विभाग अब पोस्ट-सर्च जांच में जुट गया है। वित्तीय अनियमितताओं की गहराई से जांच के लिए निदेशकों और प्रमुख कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

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