मुरादनगर (शिखर समाचार) रावली रोड स्थित चुंगी नंबर तीन के पास रामलीला मैदान में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में क्षेत्र भर से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। आयोजन का प्रारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिसके साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण बन गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि दीपांकर महाराज ने कहा कि हिन्दू समाज की वास्तविक ताकत उसकी सांस्कृतिक जड़ों, पारिवारिक परंपराओं और नैतिक जीवन मूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में अपनी पहचान और परंपराओं को सहेज कर रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नई पीढ़ी को धर्म, इतिहास और संस्कारों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे भारतीय जीवन शैली को अपनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्य वक्ता सुनील ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होना पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि संगठन ने लंबे समय से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में निरंतर कार्य किया है। उन्होंने बताया कि ऐसे सम्मेलनों का उद्देश्य समाज में परस्पर विश्वास, भाईचारा और सहयोग की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के लिए संगठित प्रयास करें।
रंगोलियों और देशभक्ति से सजी संस्कृति महोत्सव: समाज ने लिया एकता और परंपरा के प्रति समर्पण का संकल्प
विभाग प्रचारक अतुल ने कहा कि समाज को अपनी परंपराओं और गौरवशाली विरासत के प्रति सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने संगठन की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि जब समाज एक सूत्र में बंधता है तो वह किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हो जाता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से सेवा कार्यों, संस्कार निर्माण और राष्ट्रभक्ति से जुड़े प्रयासों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया।
कार्यक्रम स्थल पर बच्चों द्वारा बनाई गई रंगोलियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। इसके साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में देशभक्ति गीत, नृत्य और नाट्य अंश प्रस्तुत किए गए, जिन्हें दर्शकों ने सराहा। साहित्य प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और इतिहास से संबंधित पुस्तकों और प्रकाशनों को देखा और खरीदा गया।
सम्मेलन के अंत में उपस्थित जनसमूह ने धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए समर्पित रहने का सामूहिक संकल्प दोहराया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ।
