फिल्मों और वेब श्रृंखलाओं में जाति सूचक शब्दों पर रोक की मांग, पूर्व राज्य मंत्री सुनील भराला ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा पत्र

Rashtriya Shikhar
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Demand to Ban Caste-Indicative Words in Films and Web Series; Former State Minister Sunil Bharala Submits Letter to Union Minister IMAGE CREDIT TO सुनील भराला

हापुड़ (शिखर समाचार) पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री सुनील भराला ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर फिल्मों और वेब श्रृंखलाओं में जाति आधारित अपमानजनक शब्दों के प्रयोग पर रोक लगाने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने एक औपचारिक पत्र सौंपते हुए कहा कि हाल के समय में कुछ फिल्मी और डिजिटल मंचों पर प्रसारित सामग्री में विशेष समाज और जाति को नकारात्मक तथा आपराधिक छवि में दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो सामाजिक संतुलन और सौहार्द के लिए हानिकारक है।
सुनील भराला ने कहा कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से कुछ निर्माता आपत्तिजनक संवाद और शब्दावली का उपयोग कर रहे हैं। “घूसखोर पंडित” जैसे शब्दों का प्रयोग न केवल अनुचित है बल्कि इससे समाज के एक वर्ग की गरिमा को ठेस पहुँचती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अभिव्यक्ति से सामाजिक विभाजन को बढ़ावा मिलता है और आपसी विश्वास कमजोर होता है।

इतिहास और संस्कृति की रक्षा के साथ जवाबदेही: पूर्व मंत्री ने फिल्मों और वेब सामग्री में संवेदनशीलता सुनिश्चित करने की मांग की

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उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि ब्राह्मण समाज का राष्ट्र जीवन, शिक्षा और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मंगल पांडे द्वारा स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत, चंद्रशेखर आज़ाद का बलिदान और मदन मोहन मालवीय का शैक्षिक योगदान देश के इतिहास का अहम हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन में भी विभिन्न विद्वानों और शिक्षकों का सहयोग रहा, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पूर्व राज्य मंत्री ने मांग की कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा फिल्मों और वेब सामग्री की समीक्षा और अधिक गंभीरता से की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष को निर्देश जारी कर ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट पर रोक लगाने और जिम्मेदार निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी समाज और वर्ग की प्रतिष्ठा सुरक्षित रह सके।

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