नकली दवाओं का जाल टूटा: मुरादनगर में बड़ी कार्रवाई, पांच दबोचे गए, पचास हजार गोलियां व पैकेज सामग्री जब्त

Rashtriya Shikhar
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Fake Drug Network Busted: Major Action in Muradnagar, Five Arrested, 50,000 Pills and Packaging Material Seized IMAGE CREDIT TO POLICE

मुरादनगर (शिखर समाचार) थाना मुरादनगर पुलिस और ग्रामीण जोन की स्वॉट टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर नकली दवाओं के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा किया है। छापेमारी के दौरान एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से लिव-52 नाम से बेची जा रही पचास हजार संदिग्ध गोलियां, भारी मात्रा में पैकेज सामग्री और एक कार बरामद की गई है। गिरोह से जुड़े अन्य छह लोगों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया था कि एनपी ट्रेडिंग के नाम से संचालित कारोबार के जरिए फर्जी जीएसटी नंबर, नकली औषधि अनुज्ञापत्र और जालसाजी से तैयार दस्तावेजों के सहारे नामी कंपनी के नाम पर नकली दवाओं का निर्माण और वितरण किया जा रहा है। मामले को गंभीर मानते हुए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा कॉपीराइट कानून की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विशेष टीमों का गठन किया गया।

पुलिस ने बड़ा नकली दवा गिरोह किया पर्दाफाश: मेरठ-गाजियाबाद से 50 हजार गोलियों सहित पांच आरोपी गिरफ्तार

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सूचना तंत्र की मदद से पुलिस ने घेराबंदी कर पांच आरोपियों मयंक अग्रवाल निवासी मोदीनगर, अनुप गर्ग निवासी उत्तम नगर दिल्ली, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर निवासी नंदग्राम गाजियाबाद और नितिन त्यागी निवासी ग्राम निवाड़ी को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान 500 रेपर शीट, 1200 हरे ढक्कन, 1200 सफेद प्लास्टिक डिब्बियां और दस पारदर्शी थैलियों में भरी कुल पचास हजार गोलियां बरामद हुईं।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि पैकेज सामग्री मेरठ के एक प्लास्टिक उद्योग से तैयार कराई जाती थी, जबकि रेपर की छपाई भी मेरठ क्षेत्र के एक मुद्रण प्रतिष्ठान में कराई जाती थी। डिब्बियों और ढक्कनों की ढलाई के लिए अलग से डाई तैयार करवाई गई थी। नकली गोलियां सोनीपत स्थित एक प्रयोगशाला से बनवाई जाती थीं। इसके बाद तैयार माल को एकत्र कर एनपी ट्रेडिंग के नाम से बाजार में उतारा जाता था। फर्जी बिल और जीएसटी कागजात बनाकर विभिन्न कंपनियों को आपूर्ति दिखाई जाती थी और भुगतान एक ही खाते में मंगाकर आपस में बांट लिया जाता था।
पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं। जब्त नमूनों की जांच कराई जा रही है और गिरोह के आपराधिक इतिहास तथा आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल शुरू कर दी गई है।

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