गढ़मुक्तेश्वर (शिखर समाचार) गढ़ क्षेत्र के पौराणिक गांव पुष्पावती पूठ में माघ मास के पावन अवसर पर श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व आस्था और उल्लास से ओतप्रोत भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। यह कलश यात्रा गांव के प्राचीन श्री गंगा मंदिर से विधि विधान के साथ प्रारंभ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष शामिल हुए। भक्तों ने सिर पर कलश धारण कर भजन-कीर्तन करते हुए पूरे गांव में भ्रमण किया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
कलश यात्रा और श्रीमद्भागवत कथा: भक्ति, ज्ञान और जीवन के परम तत्व की अनुभूति
प्राचीन परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ मास में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर कथा वाचक पंडित रामकृष्ण दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा विशेष रूप से पितरों की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। यह कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के माध्यम से जीवन के परम तत्व की अनुभूति कराती है तथा मनुष्य को सही अर्थों में जीवन जीने की कला सिखाती है।
कथा वाचक ने प्रसंगों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार धुंधकारी जैसे प्रेत की भी मुक्ति श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से संभव हुई। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ कथा का श्रवण किया जाए, तो मनुष्य को अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग अवश्य मिलता है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ये चारों पुरुषार्थ श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से प्राप्त होते हैं।
कलश यात्रा और कथा प्रारंभ होने से गांव में धार्मिक उल्लास का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस प्रकार के आयोजन से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि समाज में सद्भाव और संस्कारों का भी प्रसार होता है।
