नई दिल्ली (शिखर समाचार) भारत मंडपम, नई दिल्ली में चल रहे 53वें विश्व पुस्तक मेले में इस वर्ष भी पाठकों और साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय भीड़ उमड़ रही है। इसी क्रम में हॉल संख्या दो के स्टॉल आर 36 पर संस्मय प्रकाशन द्वारा भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक एवं माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजय द्विवेदी की नवीन पुस्तक ‘11 महानायक’ का औपचारिक लोकार्पण संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष अनिल जोशी के कर कमलों से किया गया, जिन्होंने इसे भारतीय नायक परंपरा और सांस्कृतिक चेतना को उजागर करने वाली प्रेरक कृति बताया।
11 महानायक’ के जरिए नई पीढ़ी को मिलेगा गौरवशाली भारत से जुड़ने का सूत्र
यह पुस्तक संस्मय प्रकाशन द्वारा वर्ष 2026 में प्रकाशित की गई है। अवसर पर संस्मय प्रकाशन की निदेशक भावना शर्मा ने कहा कि ‘11 महानायक’ भारतीय ज्ञान परंपरा के उद्दात्त चरित्रों से लेकर आधुनिक भारत के नायकों तक की गौरवशाली यात्रा को पाठकों के सामने सरल और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करती है। उन्होंने बताया कि यह कृति नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने के साथ साथ जीवन में सकारात्मक मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा भी देगी।
लोकार्पण समारोह में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’, लंदन से पधारी सुप्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार दिव्या माथुर, चर्चित व्यंग्यकार राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में लेखक, शिक्षाविद, पत्रकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा और प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
पुस्तक मेले में संस्मय प्रकाशन बना आकर्षण का केंद्र, हिंदी अभियान को मिली नई पहचान
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इन दिनों संस्मय प्रकाशन का स्टॉल पुस्तक मेले में लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां पाठकों की निरंतर भीड़ देखी जा रही है। संस्था साहित्य सेवा के साथ-साथ हिंदी भाषा को आम जनमानस से जोड़ने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है। संस्मय प्रकाशन के प्रयासों से अब तक लगभग पैंतीस लाख लोगों के हस्ताक्षर हिंदी में परिवर्तित किए जा चुके हैं, जिसे हिंदी संवर्धन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
53वें विश्व पुस्तक मेले में आयोजित यह आयोजन साहित्य और हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में सामने आया है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि ऐसे प्रयास निरंतर होते रहें तो हिंदी को वैश्विक मंच पर और अधिक मजबूती मिलेगी तथा नई पीढ़ी में पढ़ने लिखने की संस्कृति को भी नई ऊर्जा प्राप्त होगी।
