लोकतंत्र को जन-केंद्रित बनाने का संकल्प : नई दिल्ली में 28वां सीएसपीओसी ऐतिहासिक सहभागिता के साथ संपन्न

Rashtriya Shikhar
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Committing to a people-centric democracy: 28th CSPOC concludes with historic participation in New Delhi IMAGE CREDIT TO लोकसभा सचिवालय

नई दिल्ली (शिखर समाचार) राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक जन केंद्रित, उत्तरदायी और प्रभावी बनाने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। दो दिन तक चले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं तभी सशक्त और प्रासंगिक रह सकती हैं, जब वे पारदर्शी हों, सभी वर्गों को साथ लेकर चलें और जनता के प्रति जवाबदेह रहें।

लोकतंत्र में पारदर्शिता और समावेशन: नागरिक और राज्य के विश्वास का आधार

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लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि पारदर्शिता निर्णय प्रक्रिया में खुलेपन को बढ़ाती है, जिससे नागरिकों का विश्वास मजबूत होता है, जबकि समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज भी लोकतांत्रिक विमर्श में स्थान पाए। उन्होंने रेखांकित किया कि इन मूल्यों के सहारे ही नागरिक और राज्य के बीच स्थायी व भरोसेमंद संबंध विकसित होते हैं।

सम्मेलन के समापन अवसर पर ओम बिरला ने 29वें सीएसपीओसी की अध्यक्षता यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे होयल को सौंपी और लंदन में होने वाले आगामी सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 56 वर्ष पूर्व स्थापित सीएसपीओसी का उद्देश्य राष्ट्रमंडल देशों की विधायिकाओं के बीच सतत संवाद, संसदीय दक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देना रहा है, जिसे 28वें सम्मेलन ने नई ऊर्जा और व्यापक सहभागिता के साथ आगे बढ़ाया है।

लोकतंत्र की मजबूती: सहमति-असहमति के बीच संसदीय मर्यादा का संदेश

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ओम बिरला ने इस सम्मेलन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सीएसपीओसी के इतिहास में इस बार सर्वाधिक देशों की भागीदारी दर्ज की गई, जिसने इसे राष्ट्रमंडल संसदीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बना दिया। उन्होंने सम्मेलन के दौरान संसदों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग, सामाजिक माध्यमों के प्रभाव, चुनावों से आगे नागरिक सहभागिता तथा सांसदों और संसदीय कर्मचारियों के स्वास्थ्य व कल्याण जैसे विषयों पर हुई चर्चाओं को अत्यंत विचारोत्तेजक बताया।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रौद्योगिकी, समावेशन और वैश्विक साझेदारियां भविष्य की नई विश्व व्यवस्था को आकार देंगी। साथ ही कहा कि सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठकों और अनौपचारिक संवादों से सदस्य देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग और अधिक मजबूत हुआ है।

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इससे पूर्व विशेष पूर्णाधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक लोकतंत्रों के समक्ष जटिल चुनौतियां हैं, जिनका सामना करते हुए पीठासीन अधिकारियों का दायित्व है कि वे संवैधानिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं को समयानुकूल बनाएं। उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति दोनों ही लोकतंत्र की पहचान हैं, लेकिन इन्हें संसदीय मर्यादा के भीतर व्यक्त किया जाना आवश्यक है।

ओम बिरला ने डिजिटल परिवर्तन के दौर में ई संसद, कागज रहित कार्यप्रणाली और डिजिटल अभिलेखागार जैसी पहलों को लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने वाला बताया। उन्होंने संसदीय स्थायी समितियों की भूमिका को “लघु संसद” के रूप में रेखांकित करते हुए इनके सशक्तिकरण पर बल दिया। सम्मेलन के समापन पर लोक सभा अध्यक्ष ने सभी प्रतिनिधिमंडलों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और कहा कि 28वां सीएसपीओसी संवाद, सहयोग और नवाचार के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में आशावाद और एकजुटता का संदेश देकर संपन्न हुआ।

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