महामना और अटल को नमन : लोकतांत्रिक मूल्यों व भाषाई विविधता पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संदेश

Rashtriya Shikhar
4 Min Read
RSS's message of child and child movement, discipline and awareness in the city IMAGE CREDIT TO लोकसभा सचिवाल

नई दिल्ली (शिखर समाचार) संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर संसद के दोनों सदनों के सदस्य, पूर्व सदस्य, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह, राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

बहुभाषी संसद से सशक्त लोकतंत्र की ओर, भारत की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत मंच

ALSO READ:https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/ghaziabad-free-admissions-are-being-offered-in-private-schools-how-to-apply-local18-9996872.html

कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की संसदीय व्यवस्था देश की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है। लोकसभा में क्षेत्रीय और मातृ भाषाओं के प्रयोग को प्रोत्साहन देकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जनप्रतिनिधि अपनी भावनाओं और विचारों को अपनी भाषा में पूरी स्पष्टता के साथ रख सकें। इससे संसद की बहसें देश की वास्तविक सांस्कृतिक विविधता को और अधिक प्रभावी रूप से प्रतिबिंबित कर पाएंगी।

विद्यालयों और महाविद्यालयों से आए विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने महामना मालवीय को आधुनिक सोच और सनातन मूल्यों का अद्वितीय संगम बताया। उन्होंने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारतीय चेतना, संस्कृति और ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र है। स्वतंत्रता संग्राम, शिक्षा और राष्ट्रीय पुनर्जागरण में महामना मालवीय का योगदान आज भी राष्ट्र को दिशा देता है। उनका यह विश्वास कि शिक्षा राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है, आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

शब्दों की शालीनता और निर्णयों की दृढ़ता से राजनीति को नई ऊंचाई देने वाला युगपुरुष

ALSO READ:https://rashtriyashikhar.com/diagnostic-centre-inaugurated-at-ghaziabad/

अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने शालीनता, संवाद और दृढ़ निर्णय क्षमता के सहारे भारतीय राजनीति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वे केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि विचारक, कवि और लेखक भी थे, जिनकी सोच ने सार्वजनिक जीवन को नैतिक मजबूती प्रदान की। राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े विषयों पर उनके साहसिक निर्णयों ने विश्व पटल पर भारत के आत्मविश्वास को मजबूती दी।

उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, अटल बिहारी वाजपेयी ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। उनकी मर्यादित भाषा, समावेशी दृष्टि और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर संवाद करने की क्षमता उन्हें जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत बनाती है।

WhatsApp Image 2025 12 21 at 6.27.27 PM 1

लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश का भविष्य उनकी ऊर्जा, नवाचार और जिम्मेदारी से तय होगा। एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखने वाली नई पीढ़ी भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाएगी।

संसदीय लोकतंत्र अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए 530 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने संविधान निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक स्थल पर संवाद कर दोनों महान विभूतियों के विचारों और योगदान को नमन किया। इससे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने ‘सदैव अटल’ स्मृति स्थल पहुंचकर भी अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

Share This Article
Leave a comment