हमीरपुर (शिखर समाचार) चंदेल युग की चंद्रावल नदी सदियों से जल संरक्षण और जीवनदायिनी के रूप में विख्यात रही है। आज यह ऐतिहासिक और पौराणिक नदी अपनी खोई हुई चमक और प्राकृतिक स्वरूप को पाने के लिए तरस रही है। करीब 31 किलोमीटर लंबी यह नदी जनपद महोबा से निकलकर हमीरपुर जिले की मौध तहसील से गुजरते हुए केन नदी में मिलती है।
अतिक्रमण और लापरवाही ने किया चंद्रावल नदी का कायाकल्प कठिन: नदी नाले जैसी स्थिति में
विगत कई दशकों से अतिक्रमण और लापरवाही के कारण नदी का स्वरूप बेहद क्षीण हो गया है। कई स्थानों पर रपटा बनने और जमी हुई मिट्टी की सफाई न होने के कारण चंद्रावल नदी नाले जैसी स्थिति में आ गई है।
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को सुधारने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने स्वयं संभाल रखी है। जलोदय जल अभियान के तहत उन्होंने पिछली बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में चंद्रावल नदी के पुनरोद्धार हेतु विस्तृत बैठक का आयोजन किया। बैठक में उन्होंने कहा कि नदी की सफाई और पुनर्स्थापना के काम को जन आंदोलन की भांति सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया जाए।
चंद्रावल नदी की पुनर्जीवन की पहल: सामूहिक जिम्मेदारी से लौट सकता है प्राकृतिक वैभव
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श्री मीना ने बताया कि जीवनदायिनी चंद्रावल नदी अपने विशाल आकार और प्राकृतिक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध थी, लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी, अतिक्रमण और अनदेखी के कारण यह अति-सूक्ष्म रूप में बदल गई है। उन्होंने विभागों, उद्यमियों, खनन पट्टाधारकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और पत्रकार साथियों से मिलकर इस पुनीत कार्य में सहयोग देने की अपील की। उनका मानना है कि यदि यह कार्य सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में लिया जाए तो निश्चित ही सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।
चंद्रावल नदी 68 किलोमीटर लंबी है और इसका जल संग्रहण क्षेत्र 990 वर्ग किलोमीटर में फैला है। नदी में 17 चेक डैम बनाए गए हैं और यह 22 गांवों से होकर गुजरती है। अत्यधिक सिल्ट जमने के कारण नदी का आकार लगातार सिकुड़ रहा है, जिससे इसका अस्तित्व खतरे में है।

नदी के जीर्णोद्धार से नायकपुरवा, इचौली, सिजवाही, कपसा, गुसियारी समेत दर्जनों गांवों के किसानों को सिंचाई का पर्याप्त पानी मिलेगा। पुनरोद्धार कार्य आज सुबह 10 बजे पड़ौरी गांव से जिलाधिकारी श्री घनश्याम मीना की निगरानी में शुरू होगा। यह कार्य पूरी तरह जनसहयोग और सीएसआर (CSR) फंड से संपन्न होगा।
कार्यक्रम में नदी की गहराई और चौड़ाई में एकरूपता लाने, गाद निकालने, चेक डैम बनाने और पौधारोपण करने जैसे कार्य शामिल होंगे, ताकि नदी का वैभव लौटे और जल संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
