माखन-चोरी लीला मनुष्य को जीवन का सार समझाती है : साध्वी पद्महस्ता भारती

Rashtriya Shikhar
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The tale of stealing butter teaches humans the essence of life: Sadhvi Padmahasta Bharti IMAGE CREDIT TO जाग्रति ज्योति संस्थान

मुरादनगर (शिखर समाचार)।
के.एन. इंटर कॉलेज मैदान में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से संचालित ‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ के चतुर्थ दिवस की कथा में कथा व्यास पद्महस्ता भारती ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं के माध्यम से गहन आध्यात्मिक रहस्यों का मनोभावपूर्ण विवेचन किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को सत्य और आत्मबोध के मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य दिशा है।

ईश्वर की लीलाओं में छिपा गूढ़ संदेश: तर्क नहीं, ब्रह्मज्ञान और गुरु कृपा से ही समझ संभव

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उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव बुद्धि अक्सर प्रभु की लीलाओं को सामान्य घटनाओं की तरह देखने की भूल कर बैठती है, जबकि उनमें आद्यात्मिक उन्नति का गूढ़ संदेश छिपा होता है। रावण, कंस और दुर्योधन जैसे सामर्थ्यवान भी प्रभु के व्यवहार के पीछे छिपे रहस्य को न समझ सके, क्योंकि ईश्वर को तर्क से नहीं, बल्कि ब्रह्मज्ञान और सच्चे गुरु की कृपा से ही समझा जा सकता है।

कथा व्यास ने गोकुल की गलियों में घटित प्रभु की बाल-लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने माखन-चोरी लीला का विश्लेषण करते हुए कहा कि यह सिर्फ बाल-क्रीड़ा नहीं, बल्कि अत्यंत गहन आध्यात्मिक संकेत है। जिस प्रकार दूध का सार मक्खन होता है, उसी प्रकार संसार का सार परमात्म तत्व है। श्रीकृष्ण द्वारा मक्खन ग्रहण करना यह संदेश देता है कि मनुष्य को क्षणभंगुर भौतिक आकर्षणों से ऊपर उठकर अपने भीतर स्थित परमात्म तत्व को पहचानने का प्रयत्न करना चाहिए। यही मानव जीवन का वास्तविक कल्याण और उद्देश्य है। कार्यक्रम में संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आदित्यानंद, साध्वी श्वेता भारती, वसुधा भारती, ज्योति भारती, हेमा भारती, वंदना भारती सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आध्यात्मिक आनंद का लाभ उठाया।

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