बिजनौर (शिखर समाचार) आमजन की शिकायतों को एक ही मंच पर सुनकर तत्काल राहत पहुंचाने की मंशा से आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस इस सप्ताह उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। नजीबाबाद और नगीना तहसीलों में शनिवार को हुए कार्यक्रम में शिकायतों की संख्या तो अच्छी-खासी रही, लेकिन मौके पर निस्तारण की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई दी, जिससे कई शिकायतकर्ता मायूस होकर लौटे।
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने समाधान दिवस में कड़ा रुख अपनाया: शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण होगा अनिवार्य
नजीबाबाद तहसील के भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सभागार में समाधान दिवस की अध्यक्षता जिलाधिकारी जसजीत कौर ने की। उन्होंने मंच से ही अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि समाधान दिवस का उद्देश्य केवल शिकायतें दर्ज करना नहीं, बल्कि मौके पर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारण तत्काल समाधान संभव नहीं है, तो अधिकतम एक सप्ताह में शिकायतकर्ता संतुष्टि के साथ निस्तारण अनिवार्य रूप से किया जाए। उनका कहना था कि बिना शिकायतकर्ता को संतुष्ट किए किसी भी शिकायत को निस्तारित मान लेना प्रशासनिक प्रणाली के खिलाफ है।
नजीबाबाद में कुल 16 शिकायतें दर्ज हुईं, मगर उनमें से केवल एक शिकायत का समाधान मौके पर ही किया जा सका। बाकी शिकायतों को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ निपटाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए गए। कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा, अपर जिलाधिकारी न्यायिक अंशिका दीक्षित और एसडीएम नजीबाबाद सहित अनेक विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
नगीना में संपूर्ण समाधान दिवस: मौके पर समाधान न होने पर अधिकारियों को कड़ा निर्देश, गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को बनाया गया अनिवार्य
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उधर, नगीना तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस की अध्यक्षता एडीएम राजस्व वान्या सिंह ने की। यहां शिकायतों की संख्या 15 रही, लेकिन मौके पर किसी भी शिकायत का समाधान नहीं हो पाया। सभी समस्याओं को संबंधित विभागों को भेजते हुए अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में एसडीएम विनित कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी अंजनी चतुर्वेदी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार अजब सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
दोनों तहसीलों में एक भी शिकायतकर्ता को तत्काल राहत न मिल पाने से समाधान दिवस की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं। लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि लंबित शिकायतें निर्धारित अवधि में कितनी दक्षता और गंभीरता के साथ निपटाई जाती हैं।
